शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

एक सुनहरे भारत की यह छोटी सी झांकी है

एक सुनहरे भारत की यह छोटी सी झांकी है
                      अभी जमीं में नीव भरी है ऊपर शीश महल तो बनना
बाकी है
आर सी ऍम के सागर में छिपा अनमोल खजाना है
                      अभी तो 2 -4  बुँदे बरसी है सागर का बरसना बाकी
है
आर सी ऍम है ऐसा वृक्ष जो दिव्या फलों से लदा हुआ
                      अब तक तो अंकुर फूटा है वो वृक्ष तो बनना बाकी
है
आर सी ऍम है विराट शक्ति युग परिवर्तन कर देती जो ,
                                       अब तक तो अंगडाई ली है जग कर उठ
जाना बाकी है
इस मार्ग पर चलने वाले हर ऊँचाई को छू सकते है
                     अभी मार्ग ऊँचा नीचा है समतल होना तो बाकी है
इसकी सफलता को अचंभित होकर क्यों देखते हो
                     अभी तो आधार बना है शुरू होना तो बाकी है
इसके संग चलकर हर जन निहाल हो सकता है
                     लाखों के समझ में आया है करोडो को समझाना बाकी है
अब तलवारों की धार लगा लो इरादों को मजबूत बना लो
                     अब तक तो अभ्यास हुआ है अभी लडाई बाकी है
एक सुनहरे भारत की यह छोटी सी झांकी है
                     अभी जमीं में नीव भरी है ऊपर शीश महल तो बनना बाकी
है
एक सुनहरे भारत की यह - - - - -  -  -
                             (श्री टी सी छाबरा जी के अन्तस की आवाज)